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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने किया सुपोषण गोष्ठी का आयोजन


गर्भवती महिलाओं की गोद भराई के साथ किया गया बच्चों का अन्नप्राशन

फर्रुखाबाद 6 मार्च 2020 |

बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की तरफ से विभागीय योजनाओं व कार्यक्रमो की जानकारी तथा उनके बेहतर क्रियान्वयन के लिए सुपोषण गोष्ठी का आयोजन नवभारत सभा भवन में शुक्रवार को किया गया ।


कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया | इस अवसर पर कार्यक्रम में प्रतिभागियों के मध्य विभागीय अधिकारियों द्वारा सुपोषण प्राप्त करने के हेतु चलाई जा रही विभागीय योजनाओं व कार्यक्रमो के बारे में विस्तार से अपने विचार रखे गए |
साथ ही गर्भवती माताओं और छह माह से ऊपर के बच्चों का अन्नप्राशन जिलाधिकारी द्वारा किया गया |
इस दौरान जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने कहा कि आज की सुपोषित किशोरी ही बेहतर कल का निर्माण करती है | इसलिए हमें किशोरियों के साथ साथ महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना है |
कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी भारत प्रसाद ने आईसीडीएस की सम्पूर्ण प्रगति व महत्ता के बारे में बताते हुए कहा कि सुपोषण की संकल्पना विभिन्न विभागों के बेहतर ताल मेल से ही प्राप्त की जा सकती है ।
साथ ही कहा कि बच्चो के शारीरिक, मानसिक विकास के लिए स्वास्थ्य पोषण और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिए जानी वाली योजनाओ के बारे में बताते हुए उन्हें प्राप्त करने हेतु ,बाल विकास के साथ सभी सहयोगी विभागों स्वास्थ्य विभाग, ग्राम विकास विभाग ,पंचायत विभाग,शिक्षा विभाग व खाद्य एवं रसद विभाग के समेकित रूप से कार्य करने पर बल दिया।
साथ ही कहा कि 8 मार्च से 22 मार्च तक पोषण पखवाडा मनाया जायेगा जिसमें आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से बिभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी और सुपोषण गोष्ठी का आयोजन प्रतेक ब्लाक पर किया जायेगा |
साथ ही कहा कि जनपद का लिंगानुपात जो चार साल पहले 1000 लड़कों पर 859 था वह अब बढ़कर 896 हो गया है |यह आप सभी की मेहनत का ही नतीजा है, जो हम लोग इस लिंगानुपात को कम कर पाए हैं, आगे हमें और अभी काम करना है |
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ चंद्रशेखर ने बताया कि कुपोषण से मुक्ति के लिए चार मुख्य बातों पर ध्यान देने की जरूरत है। इसमें गर्भावस्था के दौरान महिला को पर्याप्त भोजन के साथ-साथ आयरन की 180 और कैल्शियम की 360 गोलियां लेनी होती है। सरकारी अस्पताल या किसी प्रशिक्षित चिकित्सक से ही प्रसव कराएं। जन्म के तुरंत बाद 1 घंटे के अंदर बच्चों को मां का दूध पिलाना शुरू करना चाहिए। छ: माह तक केवल बच्चे को मां का दूध देना चाहिए। बच्चे को ऊपर से पानी घुट्टी शहद या किसी प्रकार के टानिक देने की आवश्यकता नहीं है। 6 महीने पूर्ण होने के उपरांत बच्चे को ऊपरी आहार जैसे आंगनबाड़ी से मिलने वाला वि¨नग फूड, दलिया, मसले हुए पके फल, उबले हुए आलू या घर में बना हुआ बिना मिर्च-मसाले का भोजन अच्छी तरह से मसल कर दिया जा सकता है। 2 वर्षों तक बच्चे को मां का दूध पिलाते रहना चाहिए।
जिला पोषण विशेषज्ञ ने गर्भवती महिलाओं और बच्चों को संतुलित आहार, भोजन की आवश्यकता, भोजन की मात्रा के साथ-साथ छोटे बच्चों में सही समय पर ऊपरी आहार की शुरुआत के संबंध में जानकारी दी । बच्चे के विकास में पहले 1000 दिन की महत्ता पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर पोषण के प्रति जागरूकता के लिए बाल विकास विभाग की तरफ से पोषाहार से निर्मित व्यंजनों के साथ साग सब्जी प्रतियोगिता का स्टाल लगाकर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया ।
इस दौरान अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ दलवीर सिंह, डीपीएम कंचन बाला, बाल विकास परियोजना अधिकारी मानवेन्द्र, मनीष, पुष्पा, टीएसयू से जिला पोषण विशेषज्ञ डॉ गौरव, पोषण सखी के अतिरिक्त बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान ,आशा,आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

व्यूरो रिपोर्ट बसारत खान