योगी सरकार का बड़ा फैसला, 2020 में ग्राम प्रधानों की सम्पत्तियों की कराई जायेगी जांच, पंचायतों में भ्रष्टाचार से सीएम योगी खफा*
लखनऊ।
ग्रामीण भारत की तस्वीर को धुंधला करने वाले ग्राम प्रधानों की अब खैर नहीं होगी। सूबाई सरकार ने इस मामले में बड़ा फैसला लिया है। 2020 में सभी प्रधानों की सम्पत्तियों की जांच कराई जायेगी। केन्द्र की ओर से एडवाईजरी जारी होते ही योगी सरकार इस मामले में शिकंजा कसने लगेगी।
चुनाव जीतने के बाद ग्राम प्रधानों के एकाएक बदलते दिन और गांवों के विकास से मुंह मोड़ लेने जैसी हजारों शिकायतें आये दिन मिलने से खफा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बड़ा फैसला किया है। उन्होंने यह जाना कि पोर्टल और तमाम माध्यमों से गांवों की बिगड़ती तस्वीर की शिकायतें उन्हें मिलती रहीं हैं। चुनाव जीतने के बाद गांव तो नहीं सुधरे लेकिन प्रधान और उनके सगे सम्बन्धियों की हालत जरूर सुधर गई।
बताना जरूरी है कि गांव के विकास के लिए विभिन्न मदों से प्रधान के खाते में मोटा पैसा सरकार द्वारा भेजा जाता है। जिस पर सेक्रेटरी और प्रधान सांठ-गांठ कर जमकर मनमानी करते रहे। गांवों में बनने वाले प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री आवासों में प्रधानों द्वारा जमकर धन उगाही कर अपात्रों को आवास दे दिए गए। गांव की तस्वीर बदलने के लिए आने वाले रुपए को कागजों में ही खर्च कर दिया गया। गांव क्षेत्र में बनने वाले शौचालयों में जमकर गोलमाल किया गया। ग्रामसभा की जमीनों को तमाम प्रधानों ने अपने परिजनों और चहेतों के नाम आवंटित कर डाली।
पंचायतों में भ्रष्टाचार को रोकने और गांव के विकास को रफ्तार देने की मंशा के चलते सीएम योगी ने शिकंजा कसते हुए 2020 में होने वाले पंचायत चुनावों से पूर्व सम्बन्धित प्रधान की पिछले पांच सालों में अर्जित की गई सम्पत्ति को जांच के दायरे में किया है।
रिपोर्ट आजतक24न्यूज
