नागरिकता कानून में महिलाओं की उपस्थिति ने साबित कर दिया कि अब वे देश चला सकती- सादिया शेख
* नागरिकता कानून में भेदभाव का इस्तेमाल करना गलत- रिजवान अहमद ईस्लामी
* देश में नफरत- जुल्म- दहशतगर्दी का विकास हुआ- भानू प्रताप सिंह
समस्तीपुर,1 मार्च '20
सीएए, एनआरसी एवं एनपीआर के वापस लेने की मांग पर संविधान बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले समाहरणालय के समक्ष गत 10 जनवरी से शुरू सत्याग्रह आंदोलन रविवार को 52 वें दिन भी अनवरत जारी रहा. मौके पर बड़ी संख्या में महिला- पुरूष सत्याग्रही मौजूद थे. फैजुर रहमान फैज, नासरीन अंजुम एवं राम विनोद पासवान की तीन सदस्यीये अध्यक्षमंडली ने आहूत सभा की अध्यक्षता की. सुरेन्द्र प्रसाद सिंह एवं सादिया जाने ने सभा का संचालन किया. जेएनयू के पूर्ववर्ती छात्र मोहन मुरारी सिंह, आज का हेलाल, रफत जीनत, भोला महतो, पप्पू खान, खालीद अनवर, असगर शहनवाज, मसूद जावेद, नसीम अबदुल्ला, जीतेंद्र सिंह चंदेल, जगदीश राय, जाकीर हुसैन, प्रिति कुमारी, द्राखशा जबीं, शाहीद रजा समेत अन्य गणमान्य लोगों ने सभा को संबोधित किया.
बतौर अतिथि वक्ता सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता भानू प्रताप सिंह, मुंबई की सोशल एक्टिविस्ट सादिया शेख एवं जमाते ईस्लामी मौलाना रिजवान अहमद ईस्लामी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि नागरिकता काला कानून गैर संवैधानिक के साथ ही गैर लोकतांत्रिक भी है. उन्होंने इसे वापस लिए जाने तक सत्याग्रहियों से आंदोलन जारी रखने की अपील की. संयोजक रजिऊल ईस्लाम ने सत्याग्रह आंदोलन को शांति और सौहार्द्रपूर्ण चलाने में योगदान दिए जाने को लेकर सत्याग्रहियों के साथ जिलेवासी के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया.।
समस्तीपुर से अब्दुल कादिर की रिपोर्ट
