TOP NEWS

हर खबर आप तक, केवल आजतक 24 न्यूज पर, |    हर खबर आप तक, केवल आजतक 24 न्यूज पर,​ |    हर खबर आप तक, केवल आजतक 24 न्यूज पर, |   

माफी नहीं तो रियायत ही दे दो साहब रूम रेंट को लेकर छलका छात्रों का दर्द


प्रयागराज

नमस्कार प्रिय भाइयों, लाॅकडाउन के दूसरे चरण की शुरूआत हो चुकी हैं और जिस दिन प्रधानमंत्री जी ने इस सूचना की घोषणा की हैं। उसी दिन से मकान मालिकों की चिंता भी बढ़ने लगे हैं और अब वह छात्रों को फोन कर-कर, मैसेज कर-कर, अगर जो रूम पर हैं उनके पास जा-जाकर तगादा करने लगे हैं ऐसे जैसे हम छात्र उनका उधार खाकर बैठे हो।

देश वैश्विक महामारी से जूझ रहा है उसमें सहयोग हेतु शासन, प्रशासन, जनता से लेकर सबने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की हैं, सरकार ने निरंतर लोगों को परेशान व प्रताड़ित न करने की अपील भी की हैं चाहें व केन्द्र हो या उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार। रोजगार ठप हैं, कामगार घर बैठें हैं, मजदूर-किसान भी प्रभावित हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आमतौर पर मध्यमवर्गीय व निम्न परिवार के ही बच्चे पढ़ते हैं। जिनपर इस लाॅकडाउन का सीधा प्रभाव पड़ा हैं। सरकार ने इसे भाँपते हुए किराया न लेने की बात भी कही हैं, मिडिया से लेकर नेतानगरी तक जिसकी वाहवाही भी खूब हुई पर अब जरूरत हैं इसे यथार्थ रूप देने की।

जरूरत हैं उस छात्र की आवाज सुनने की जिसके पिता रोज कमाते खाते हैं और वह अभी किराया देने में असमर्थ हैं, जरूरत हैं उस छात्र की आवाज सुनने की जिसके पिता किसान हैं और फसल तो तैयार हैं पर कटाई, बेचाई अभी प्रभावित होने से नहीं दे पा रहा, जरूरत हैं उस छात्र की आवाज उसने की जो घर कैसे भी पहुँच गया हैं और उसे पैसे जल्द न देने पर सामान निकालने की धमकी दी जा रही, जरूरत हैं उन छात्रों की आवाज सुनने की जो बचे पैसे से राशन चलाकर बाद में देने की बात कर रहें पर उन्हें परेशान किया जा रहा है।

साहब, हम छात्र हैं। भले गरीब, मजदूर, किसान के बेटे हैं पर हम कभी यह नहीं कहते कि हम आपका किराया नहीं देंगे। सरकार ने भले कहा हैं कि किराया नहीं देना हैं पर हम वह भी नहीं कहते कि नहीं देंगे। क्योंकि हम जानते हैं कि हमारे तरह कुछ आपलोग भी प्रभावित हैं जिनका जीविकोपार्जन रूम के किराए से ही चलता हैं। हमें किराया में माफी तो नहीं पर कम से कम रियायत तो दे दिजिए ना साहब।

रियायत समय का कि जब हमारी फसलें कट जाएँ और बिक जाएँ तो दे देंगे, जब हम पुनः वापस इस विषम परिस्थिति से आ जाएँ तो दे देंगे, जब घर वाले पैसे पुनः आराम से भेजने लगे तो हम दे देंगे, बस यही चाहिए।

एक गुजारिश अपील हैं प्रशासन से भी कि उन छात्रों के लिए मदद की जाएँ चिन्हित कर के जिनके पिता एकदम असमर्थ हैं, उनके लिए त्वरित रूप से कार्रवाई की जाएँ। क्योंकि यह समय जंग व युद्ध का नहीं, आंदोलन अनशन का नहीं, समन्वय का हैं। हमें मकान मालिकों व छात्रों के बीच समन्वय स्थापित कर ऐसे विषम परिस्थितियों में सेवा व सहयोग की अपेक्षा करनी व रखनी चाहिए ताकि न वह प्रभावित हो, न हम।

क्योंकि यह आॅफर नहीं महामारी हैं।
उचित लोग लाभान्वित हो यह हमारा ध्येय हो।

बाकि अगर कोई मकान मालिक, पीजी मालिक, हाॅस्टल मालिक ज्यादा उछल कूद करता हैं तब प्रशासनिक कार्रवाई करने के लिए हम आगे बढ़े। अभी हमें रियायत मिलें, हमारी यहीं सोच व राय हैं।

आपके क्या राय विचार हैं आप जरूर बताइए।
फिर कल छात्रसंघ के पैड से जिला प्रशासन को व ट्विटर @aldunifamily के जरिए राज्य व केन्द्र सरकार को सूचित कर उचित कार्रवाई की माँग होगी।

जयतु जय जय विश्वविद्यालय इलाहाबाद।
*रिपोर्ट मोहम्मद साबिर*