नवजात बच्ची की शव बना कुत्ते का निबाला मामले में अबतक FIR नहीं शर्मनाक- सुरेन्द्र
* हास्पिटल संचालक एवं पुलिसिया सांठगांठ की जांच व कारबाई की मांग पर जिलाधिकारी को आवेदन सौंपा गया- माले
समस्तीपुर ।
5 मार्च! 2 मार्च को करीब 12 बजे दिन में शहर के निर्माणाधीन मिश्रा कंपलेक्स, मोहनपुर रोड के किनारे कूड़े के ढे़र पर स्थानीय दुकानदारों द्वारा नवजात बच्ची की शव को कुत्ते द्वारा नोंच कर खाते देखा गया. दुकानदारों ने कुत्ते को भगाकर स्थानीय लोगों को जानकारी दी. मौके पर पहुंचे भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह भी पहुंचे. उन्होंने देखा कि शव के ऊपर भारती हॉस्पिटल एस एफ, 0-1, डेट- 29/ 02/'20 लिखा हुआ स्टीकर सटा था. माले नेता ने सिविल सर्जन को फोन कर इसकी जानकारी दी पर उन्होंने शव उठबाने से इंकार कर दिया. फिर नगर थानाध्यक्ष, फिर मुफस्सिल थानाध्यक्ष को माले नेता ने इसकी जानकारी दी पर उन्होंने भी शव बरामद करने की जहमत नहीं उठाई. पुनः उन्होंने सदर एसडीओ को फोन कर पूरी स्थिति की जानकारी दी. सदर एसडीओ के आदेश पर करीब 3 बजे शाम महिंद्रा ट्रैक्टर एजेंसी, मोहनपुर रोड के पास से स्थानीय लोगों द्वारा कुत्ते से छीनकर रखा गया शव नगर पुलिस ने बरामद की. तत्पश्चात माले नेता ने अनुमंडलाधिकारी, सदर डीएसपी एवं नगर थानाध्यक्ष से मिलकर तमाम दोषियों पर त्वरित कारबाई की मांग की. आरोपी उक्त हॉस्पिटल को जो हीरो एजेंसी से सटे उत्तर मोहनपुर रोड में है लोकेट भी कराया गया. बावजूद पुलिस ने सांठगांठ कर अब तक एफआईआर दर्ज नहीं किया है. करीब 3 घंटे तक कुत्ते शहर में घूम- घूम कर शव को नोंच-
नोंच कर खा रहे थे, मानवता शर्मसार हो रही थी. इसके ठोस सबूत भी है. बावजूद एफआईआर दर्ज व अन्य कारबाई नहीं किया जाना आश्चर्यजनक है.
प्रतिनिधिमण्डल में शामिल माले अनवर, मो० जमशेद, शहनवाज असगर, में सगीर, मनोज शर्मा एवं माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि अब इतना ठोस सबूत के बाद भी कारबाई नहीं होता है तो आने वाले दिनों में इस प्रकार की घटना पर सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा चुप्पी साधकर ही मानवता को शर्मसार होते देखने के अलावा कोई दूसरी रास्ता नहीं बचता है. इसे लेकर उन्होंने गुरूवार को जिलाधिकारी को आवेदन देकर दोषी भारती हास्पिटल, सिविल सर्जन एवं पुलिस आदि की संदिग्ध भूमिका की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग अन्यथा उन्होंने आंदोलन चलाने की घोषणा की है।
समस्तीपुर से अब्दुल कादिर की रिपोर्ट
