गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी के नाम पर सरकार वाकई गंभीर है या फिर सिर्फ गर्मियों मे नेताओ का पिकनिक मनाने का जरिया बना रही हैं !
गैरसैण में अस्थाई “राजधानी” चाहिये “ग्रीष्मकालीन नहीं यूकेडी डेमोक्रेटिक
गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी के नाम पर सरकार वाकई गंभीर है या फिर सिर्फ गर्मियों मे नेताओ का पिकनिक मनाने का जरिया बना रही हैं !
या फिर जिन लोगो ने अपनी प्राण की बलि दी हैं उत्तराखण्ड राज्य बनाने मे क्या उन लोगो की आत्मा को शान्ति पहुचानने का काम कर रही हैं सरकार
बीजेपी सरकार ने 2017 मे अपने चुनावी वायदे के अनुसार त्रिवेन्द्र रावत सरकार ने आखिरकार भराड़ीसैण में ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा कर ही दी। यह सरकार 2022 के चुनाव को व छेत्रिय जनता को मरहम लगाने का काम कर रही हैं सरकार !!
पिछ्ले 19 सालो से बारी बारी से बीजेपी कांग्रेस की सरकार रही हैं अभी अचानक सरकार को पहाड़ो की क्यों याद आई हैं
तो ग्रीष्मकालीन सत्र ही क्यों आज अब बीजेपी कांग्रेस के नेताओ को लग गया कि 2022 मे जनता एक नया छेत्रिय बिकल्प दे रही हैं । यह त्रिवेन्द्र रावत सरकार आनन फानन मे दिया गया फैसला जरा सब समझ चुकी हैं
लेकिन अगर हिमाचल प्रदेश की शीतकालीन सत्र की तरह यहां ग्रीष्मकालीन विधानसभा सत्र चलाने भर का है तो यह पहाड़ की जनता के साथ धोखा व पहाड़ी लोगो को मरहम लगाने का काम किया है सरकार ने
वर्तमान के पूर्ण राज्य महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश तथा केन्द्र शासित जम्मू-कश्मीर में ही दो राजधानियां है, मगर जम्मू-कश्मीर की तरह कुछ महीनों के लिये सरकार अन्यत्र कहीं भी दूसरी जगह पर टिक कर शासन नहीं चलाती है।
जनता से धोखा ,संसाधनों का दुरुपयोग ! सरकारी खजाने को लुटने का सडयंत्र कर रही हैं बीजेपी सरकार
अगर भराड़ीसैण में सचमुच ग्रीष्मकालीन राजधानी चलाने की सरकार की मंशा है तो इसका मतलब ग्रीष्मकाल में वहीं से प्रदेश का शासन विधान चलना है। इसलिये ग्रीष्मकालीन राजधानी के लिये भराड़ीसैण में भी भवन आदि उतने ही बड़े ढांचे की जरूरत होगी जितनी कि देहरादून में उपलब्ध है। इसमें कम्प्यूटर आपरेटर और समीक्षा अधिकारी से लेकर मुख्यसचिव तक के सभी के कार्यालय और आवासीय भवन गैरसैण या भराड़ीसैण में उपलब्ध कराने होंगे। यही नहीं वहां चपरासी और बाबू से लेकर अधिकांश विभागों के दफ्तर भी बनाने होंगे। होटल मॉल हॉस्पिटल आदि, सभी सुविधाए देनी होगी सरकार को
अगर ऐसा नहीं होता है और ग्रीष्मकालीन राजधानी का अभिप्राय केवल विधानसभा के ग्रीष्मकालीन सत्र से है तो यह पहाड़ की जनता के साथ धोखा और प्रदेश के बेहद सीमित संसाधनों का दुरुपयोग होगा।
डीपीएस रावत। उत्तराखण्ड
गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी के नाम पर सरकार वाकई गंभीर है या फिर सिर्फ गर्मियों मे नेताओ का पिकनिक मनाने का जरिया बना रही हैं !
या फिर जिन लोगो ने अपनी प्राण की बलि दी हैं उत्तराखण्ड राज्य बनाने मे क्या उन लोगो की आत्मा को शान्ति पहुचानने का काम कर रही हैं सरकार
बीजेपी सरकार ने 2017 मे अपने चुनावी वायदे के अनुसार त्रिवेन्द्र रावत सरकार ने आखिरकार भराड़ीसैण में ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा कर ही दी। यह सरकार 2022 के चुनाव को व छेत्रिय जनता को मरहम लगाने का काम कर रही हैं सरकार !!
पिछ्ले 19 सालो से बारी बारी से बीजेपी कांग्रेस की सरकार रही हैं अभी अचानक सरकार को पहाड़ो की क्यों याद आई हैं
तो ग्रीष्मकालीन सत्र ही क्यों आज अब बीजेपी कांग्रेस के नेताओ को लग गया कि 2022 मे जनता एक नया छेत्रिय बिकल्प दे रही हैं । यह त्रिवेन्द्र रावत सरकार आनन फानन मे दिया गया फैसला जरा सब समझ चुकी हैं
लेकिन अगर हिमाचल प्रदेश की शीतकालीन सत्र की तरह यहां ग्रीष्मकालीन विधानसभा सत्र चलाने भर का है तो यह पहाड़ की जनता के साथ धोखा व पहाड़ी लोगो को मरहम लगाने का काम किया है सरकार ने
वर्तमान के पूर्ण राज्य महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश तथा केन्द्र शासित जम्मू-कश्मीर में ही दो राजधानियां है, मगर जम्मू-कश्मीर की तरह कुछ महीनों के लिये सरकार अन्यत्र कहीं भी दूसरी जगह पर टिक कर शासन नहीं चलाती है।
जनता से धोखा ,संसाधनों का दुरुपयोग ! सरकारी खजाने को लुटने का सडयंत्र कर रही हैं बीजेपी सरकार
अगर भराड़ीसैण में सचमुच ग्रीष्मकालीन राजधानी चलाने की सरकार की मंशा है तो इसका मतलब ग्रीष्मकाल में वहीं से प्रदेश का शासन विधान चलना है। इसलिये ग्रीष्मकालीन राजधानी के लिये भराड़ीसैण में भी भवन आदि उतने ही बड़े ढांचे की जरूरत होगी जितनी कि देहरादून में उपलब्ध है। इसमें कम्प्यूटर आपरेटर और समीक्षा अधिकारी से लेकर मुख्यसचिव तक के सभी के कार्यालय और आवासीय भवन गैरसैण या भराड़ीसैण में उपलब्ध कराने होंगे। यही नहीं वहां चपरासी और बाबू से लेकर अधिकांश विभागों के दफ्तर भी बनाने होंगे। होटल मॉल हॉस्पिटल आदि, सभी सुविधाए देनी होगी सरकार को
अगर ऐसा नहीं होता है और ग्रीष्मकालीन राजधानी का अभिप्राय केवल विधानसभा के ग्रीष्मकालीन सत्र से है तो यह पहाड़ की जनता के साथ धोखा और प्रदेश के बेहद सीमित संसाधनों का दुरुपयोग होगा।
डीपीएस रावत। उत्तराखण्ड
