गौरी की गई बुआ के सुपुर्द*
फर्रुखाबाद। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए सुभाष व पत्नी रूबी की मौत के बाद उनकी इकलौती पुत्री गौरी कोतवाली मोहम्मदाबाद में तैनात महिला सिपाही के पास थी। वही उसकी देखरेख और भरण-पोषण कर रही थीं।
कोतवाली मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव करथिया निवासी सुभाष ने 23 बच्चों को घर के अन्दर बंधक बना लिया था। काफी समझाने बुझाने के बाद भी सुभाष ने बच्चों को नहीं छोड़ा और पुलिस मुठभेड़ में वह मौत के मुंह में समा गया। उसकी पत्नी रूबी जब घर से निकल कर भागी तो भीड़ ने पीट-पीट कर उसे भी मौत के घाट उतार दिया। कड़ी मशक्कत के बाद
बच्चों को सुरक्षित बाहर निकला गया था। सुभाष की पुत्री गौरी उस समय से कोतवाली मोहम्मदाबाद में तैनात महिला सिपाही रजनी की सुपुर्दगी में थी।
सुभाष की मां सुरजा देवी पत्नी जगदीश ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई थी कि उनकी पौत्री गौरी को उनकी सुपुर्दगी में दे दिया जाए जिससे कि वह उसका भरण-पोषण कर सकें। जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए किशोर न्याय बालकों की देखरेख और संरक्षण अधिनियमद्ध के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट सदस्य व अन्य अधिकारियों से राय-मश्विरा कर कानूनी कार्रवाई करते हुए गौरी को उसकी बुआ वेदवती पत्नी अजय कुमार निवासी ढुंइया कोतवाली शहर के हवाले की सुपुर्दगी में दे दिया है। उन्होंने भी डेढ़ वर्षीय गौरी के भरण-पोषण करने की जिम्मेदारी संभाली है। गौरी को पाकर उसकी बुआ वेदवती व दादी सुरजा देवी काफी खुश नजर आ रही थीं। उनका कहना है कि वह गौरी को दुलार कर रखेंगी। किसी तरह का कष्ट नहीं होने देंगी।
ब्यूरो रिपोर्ट शैलेंद्र वर्मा सोनू राजपूत की रिपोर्ट
