मकान के ऊपर से जा रही 440 बोल्टेज लाइन बनी है जानलेवा , प्रार्थनापत्र देने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं , पीड़ित ने विधुत बिभाग पर लापरवाही के गंभीर आरोप।
जनपद एटा ,
क्या है पूरा मामला ?
एक मकान जिसके ऊपर से 440 बोल्टेज की लाइन गुजर रही है जो परिवार के बच्चे , महिलाएं ,पुरुष ,व जानवरों के लिए काल बनी हुई है। जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। पुर्व में भी कई हादसे हो चुके हैं इसके मद्देनजर कोई बड़ा हादसा ना हो जाये इससे पहले पीड़ित ने सम्बंधित अधिकारियों को लाइन हटवाने के लिए कई बार लिखित प्रार्थना पत्र दिए लेकिन कोई संज्ञान नहीं लिया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
मीडिया को सुनाई पीड़ित ने अपनी आपबीती-:
जब मकान के ऊपर से जा रही लाइन से आमजन को खतरे की भनक मीडियाकर्मियों को लगी तो तत्काल पीड़ित परिवार के पास पहुंचे और पीड़ित से जानकारी ली तो पीड़ित ने आपबीती परेशानियों को मीडिया के सामने रखा और विद्युत बिभाग पर लापरवाही के गम्भीर आरोप लगाए। पीड़ित ने यह भी बताया कि मेरे परिवार के सदस्यों व जानवरों को इस लाइन से खतरा है कभी भी इसके करंट का शिकार हो सकते हैं। मैने कई बार अधिकारियों व नदरई कासगंज फीटर को प्रार्थना पत्र दिए लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई। अगर किसी भी प्रकार का कोई हादसा होता है तो इसका जिम्मेदार बिधुत बिभाग होगा। यह सब पीड़ित ने मीडिया को बताया।
क्या है बिधुत बिभाग की लापरवाही?
सोचनीय विषय है कि जब पीड़ित ने उच्चाधिकारियों व नदरई कासगंज फीटर में लाइन हटवाने को लेकर लिखित प्रार्थनापत्र दिये तो संज्ञान क्यों नहीं लिया गया। क्या जानकर भी अनजान बनना चाहते हैं ये जिम्मेदार या किसी बड़े हादसे का इंतजार है। आखिर क्या जिम्मेदारियां है बिभाग की ? इतनी बड़ी मुसीबत से जूझ रहा यह परिवार , कभी भी कोई भी इस लाइन की चपेट में आ सकता है। इसके बाबजूद भी बिधुत बिभाग मौन क्यों है ?
क्या बिभाग करेगा पीड़ित परिवार की समस्या का समाधान ?
पीड़ित परिवार इस समस्या को लेकर बहुत चिंतित है , पीड़ित अपने परिवार के साथ उसी इकलौते मकान में अपना जीवन यापन करता है। उसे इसी बात का डर सताता रहता है कि कहीं कोई हादसा ना हो जाये। ये तो जिसके दिल पर गुजरती है वही जानता है। बिधुत बिभाग को इस पीड़ित की समस्या का समाधान करना होगा । पीड़ित के द्वारा लगाई गई गुहार का कोई असर पड़ेगा या बिधुत बिभाग को हादसे का इंतजार रहेगा।


