योग के विभिन्न आयामों द्वारा किया जा सकता है प्रतिरोधक क्षमता का विकास और कोरोना जैसी माहमारी से वचाव
योग के विभिन्न आयामों द्वारा प्रतिरोधक क्षमता का विकास किया जा सकता है जिससे कि कोरोना जैसी महामारी से बचाव किया जा सकता है।
परंतु योग की विधाओं को एक अच्छे योग शिक्षक के निर्देशन में ही करिये।
उपाय-
सूर्य नमस्कार -12 स्टेप । -मंडूकासन-इसके माध्यम से मधुमेह कोलाइटिस एवं पैंक्रियास से इंसुलिन को रिलीज किया जा सकता है।
-ताड़ासन- खिंचाव एवं तनाव करता है पूरे शरीर का -उत्तानपादासन- हमारी तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है।
-उष्टासन- पाचन तंत्र एवं फेफड़ों को बल देता है।
-हलासन- रक्त का संचार करता है -पश्चिमोत्तानासन- यकृत व गुर्दे को सक्रिय करता है ।
-वज्रासन -एकमात्र आसन जो रात में खाने के बाद किया जाता है या इसको कभी भी किया जा सकता है। इस आसन से खाना पचने में गैस में कब्ज में पेट से संबंधित सभी विकारों में यह सहायक है ।
शवासन-यह आसन रात्रि में सोने से पहले और हर आसन करने के बाद अवश्य करें।
इसके उपरांत जो सबसे आवश्यक है वह प्राणायाम
योग शास्त्र के अनुसार श्वास और प्रश्वास की वायु को नियंत्रित और नियमित रूप से श्वास लेने व बाहर छोड़ने की प्रक्रिया को प्राणायाम कहते हैं।
प्राणों के सम्यक् व संतुलित प्रभाव को ही प्राणायाम कहते हैं। प्राणायाम -प्राण+आयाम प्राणवायु का विस्तार
प्राण -जीवन शक्ति श्वसन को लंबा करता है।
-आयाम -नियंत्रण या विस्तार करता है।
प्राणायाम आपकी श्वसन तंत्र को नियंत्रित करता है। ऊर्जा का वहन, मन में निश्चलता एवं शांति प्रदान करता है तथा एकाग्रता बढ़ाता है इसका अभ्यास पूरे शरीर का पोषण करता है कफ विकार को नियंत्रित करता है। और इस करोना जैसी महामारी को इसके माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है।
- प्राणायाम -
-अनुलोम विलोम प्राणायाम इसे नाड़ी शोधन प्राणायाम भी कहते हैं। सभी वर्गों के लिए अत्यंत ही लाभप्रद है। यह संतुलन बनाता है।
- भ्रामरी प्राणायाम-
ओंकार करना इस प्राणायाम में बताया जाता है। इससे माइग्रेन एवं अवसाद से राहत मिलती है।
-उज्जायी प्राणायाम-
थायराइड ग्रंथि एवं गले आदि के समस्याओं के लिए अत्यंत लाभदायक है ।
-कपालभाति-
यह एक शुद्धि क्रिया है जो पूरे शरीर में रक्त का संचार करती है।
- भास्त्रिका प्राणायाम -
पाचन तंत्र श्वसन तंत्र व हृदय,वात पित्त एवं कफ को संतुलित करता है।
उपरोक्त सभी प्राणायाम को करने से हमारे श्वास लेने की क्षमता बढ़ती है। हमारे शरीर में ऑक्सीजन की क्षमता बढ़ती है साथ ही साथ हमारे जो इस कोरोना जैसी महामारी बीमारी का प्रभाव हमारे श्वसन तंत्र पर है नाक पर है। हमारे श्वसन नलिका पर है और फेफड़ों पर है। अगर इस प्राणायाम को हम लोग सही तरीके से करते हैं तो हमें इस कोरोना वायरस जैसी बीमारी से राहत मिल सकती है।
योग एक पुरानी पद्धति है। इसके माध्यम से हम सभी अपने आपको अगर शुरुआत करते हैं या जो कर रहे हैं वह कर रहे होंगे तो उनको एकाग्रता मिलेगी ध्यान का एक केंद्र बनता है और उसी के माध्यम से आपके अंदर स्थिरता और संयम जैसा कि माननीय प्रधानमंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा था कि आपको सीमित रहने की आवश्यकता है। आपको स्थिर रहने की आवश्यकता है तो प्राणायाम आपकी उन आवश्यकता ओं को पूर्ण करता है और इसी के साथ स्वस्थ रहें मस्त रहें धन्यवाद।
डॉ भास्कर शुक्ला शुक्ला
योग विशेषज्ञ
हेमवती नंदन बहुगुणा। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नैनी प्रयागराज एवं
क्रीड़ा सचिव,
प्रोफेसर राजेंद्र सिंह, (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज।
रिपोर्ट मोहम्मद साबिर
परंतु योग की विधाओं को एक अच्छे योग शिक्षक के निर्देशन में ही करिये।
उपाय-
सूर्य नमस्कार -12 स्टेप । -मंडूकासन-इसके माध्यम से मधुमेह कोलाइटिस एवं पैंक्रियास से इंसुलिन को रिलीज किया जा सकता है।
-ताड़ासन- खिंचाव एवं तनाव करता है पूरे शरीर का -उत्तानपादासन- हमारी तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है।
-उष्टासन- पाचन तंत्र एवं फेफड़ों को बल देता है।
-हलासन- रक्त का संचार करता है -पश्चिमोत्तानासन- यकृत व गुर्दे को सक्रिय करता है ।
-वज्रासन -एकमात्र आसन जो रात में खाने के बाद किया जाता है या इसको कभी भी किया जा सकता है। इस आसन से खाना पचने में गैस में कब्ज में पेट से संबंधित सभी विकारों में यह सहायक है ।
शवासन-यह आसन रात्रि में सोने से पहले और हर आसन करने के बाद अवश्य करें।
इसके उपरांत जो सबसे आवश्यक है वह प्राणायाम
योग शास्त्र के अनुसार श्वास और प्रश्वास की वायु को नियंत्रित और नियमित रूप से श्वास लेने व बाहर छोड़ने की प्रक्रिया को प्राणायाम कहते हैं।
प्राणों के सम्यक् व संतुलित प्रभाव को ही प्राणायाम कहते हैं। प्राणायाम -प्राण+आयाम प्राणवायु का विस्तार
प्राण -जीवन शक्ति श्वसन को लंबा करता है।
-आयाम -नियंत्रण या विस्तार करता है।
प्राणायाम आपकी श्वसन तंत्र को नियंत्रित करता है। ऊर्जा का वहन, मन में निश्चलता एवं शांति प्रदान करता है तथा एकाग्रता बढ़ाता है इसका अभ्यास पूरे शरीर का पोषण करता है कफ विकार को नियंत्रित करता है। और इस करोना जैसी महामारी को इसके माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है।
- प्राणायाम -
-अनुलोम विलोम प्राणायाम इसे नाड़ी शोधन प्राणायाम भी कहते हैं। सभी वर्गों के लिए अत्यंत ही लाभप्रद है। यह संतुलन बनाता है।
- भ्रामरी प्राणायाम-
ओंकार करना इस प्राणायाम में बताया जाता है। इससे माइग्रेन एवं अवसाद से राहत मिलती है।
-उज्जायी प्राणायाम-
थायराइड ग्रंथि एवं गले आदि के समस्याओं के लिए अत्यंत लाभदायक है ।
-कपालभाति-
यह एक शुद्धि क्रिया है जो पूरे शरीर में रक्त का संचार करती है।
- भास्त्रिका प्राणायाम -
पाचन तंत्र श्वसन तंत्र व हृदय,वात पित्त एवं कफ को संतुलित करता है।
उपरोक्त सभी प्राणायाम को करने से हमारे श्वास लेने की क्षमता बढ़ती है। हमारे शरीर में ऑक्सीजन की क्षमता बढ़ती है साथ ही साथ हमारे जो इस कोरोना जैसी महामारी बीमारी का प्रभाव हमारे श्वसन तंत्र पर है नाक पर है। हमारे श्वसन नलिका पर है और फेफड़ों पर है। अगर इस प्राणायाम को हम लोग सही तरीके से करते हैं तो हमें इस कोरोना वायरस जैसी बीमारी से राहत मिल सकती है।
योग एक पुरानी पद्धति है। इसके माध्यम से हम सभी अपने आपको अगर शुरुआत करते हैं या जो कर रहे हैं वह कर रहे होंगे तो उनको एकाग्रता मिलेगी ध्यान का एक केंद्र बनता है और उसी के माध्यम से आपके अंदर स्थिरता और संयम जैसा कि माननीय प्रधानमंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा था कि आपको सीमित रहने की आवश्यकता है। आपको स्थिर रहने की आवश्यकता है तो प्राणायाम आपकी उन आवश्यकता ओं को पूर्ण करता है और इसी के साथ स्वस्थ रहें मस्त रहें धन्यवाद।
डॉ भास्कर शुक्ला शुक्ला
योग विशेषज्ञ
हेमवती नंदन बहुगुणा। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नैनी प्रयागराज एवं
क्रीड़ा सचिव,
प्रोफेसर राजेंद्र सिंह, (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज।
रिपोर्ट मोहम्मद साबिर


