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लॉक डाउन के नियम आम और खास के लिए अलग अलग होना दुर्भाग्यपूर्ण - आलोक मेहता

समस्तीपुर

बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश प्रधान महासचिव  आलोक कुमार मेहता ने लॉक डाउन की अवधि के दौरान परेशान हो रहे गरीबों ,वंचितों, मजदूरों की स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा की वैश्विक महामारी से बचाव के लिए लॉक डाउन की घोषणा सरकार के द्वारा की गई जो लोग जहां थे वहीं उन्हें रोक दिया गया लेकिन इसी बीच सरकार में पहुंच रखने वाले लोगों के द्वारा खुलेआम लॉक डाउन के नियमों का उल्लंघन करने का मामला लगातार समाचारों में आ रहा है।


कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र की शादी में हजारों वीआईपी मेहमानों के बीच भव्य शादी समारोह का आयोजन किया जाता है।विदेश में फंसे वीआईपी लोगों को सरकार चार्टर्ड प्लेन से अपने देश लाती है। इतना ही नहीं बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री बसें भेजकर अन्य राज्यों से अपने लोगों को बुलाती है लेकिन बिहार यूपी और झारखंड के लोग इस कठिन परिस्थिति में बेबसी के हालत में जीने को छोड़ देती है।सरकार की तरफ से उन्हें कोई मदद नहीं किया जाता है।सत्ता का यह जालिम चरित्र बड़ा ही खौफनाक है देश के संवेदनहीन सरकार में मानवीय संवेदना नहीं बची। देश की आधी ग़रीब आबादी त्राहिमाम कर रहे है। लोग उनकी दीनता और ग़रीबी का दिए-मोमबत्ती और पटाखे जला जश्न मना रहे है। इस देश में सिर्फ़ अमीर और संपन्न लोगों को ख़ुश करने की ही राजनीति हो रही है। सच्चाई तो यह है ग़रीब, सरकार के विचार-विमर्श में है ही नहीं। सरकार के क्रियाकलापों का अवलोकन इस बात की पुष्टि करती है कि लॉकडाउन के नाम पर सरकार के आम और ख़ास लोगों के नियम अलग अलग है जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
उक्त आशय की जानकारी युवा राजद के जिला मीडिया प्रभारी सह प्रवक्ता संजय नायक ने प्रेस को दी।

समस्तीपुर से अब्दुल कादिर