कोरोना वायरस को लेकर मुर्गी व मछली पालन संकट में *रोटी को मोहताज़ हुए मुर्गी व मछली पालन कर्ता *आलू के भाव बिक रहा मुर्गा फिर भी खरीददार नही।
पवन कुमार यादव
देवरिया
जिले में मुर्गी व बकरी पालन का धंधा कोरोना वायरस को लेकर खस्ताहाल बना हुआ है।मुर्गी व बकरी पालन स्वामी रोटी रोटी को मोहताज़ होते दिख रहे हैं,जब से कोरोना वायरस का प्रकोप का असर देश के अंदर दिखने को मिला है तब से उपभोक्ता मछली मीट से परहेज करने लगे हैं,मजे की बात तो यह है कि बाजार में मुर्गा 100 रुपये में तीन किलोग्राम मिल जा रहा है जबकि कटहल 80 रुपये किलो मिल रहा है,बावजूद लोगों के अंदर कोरोना का इतना भय ब्याप्त है कि लोग मुर्गा मछली खाने से परहेज कर रहे है।यदि यही हाल रहा तो पालन स्वामी से लेकर कटर(काटने वाले)तक सब भुखमरी के कगार पर आ जाएंगे।मुर्गी फॉर्म के स्वामियों को तो कई कई लाख रुपये का घाटा जा रहा है।चट्टी चौराहे पर मुर्गे व
मछली के दुकानों पर ग्राहक देखने को नही मिल रहे हैं।कोरोना का भय इसी तरह ब्याप्त रहा तो ठेले रेडी वाले जो छोटे छोटे दुकानदार हैं सब भुखमरी के कगार पर आ जाएंगे,जैसे चाट, चाउमीन, बर्गर,मोमो,पकौड़ी,पानी पूड़ी,के ठेले व रेडी वालों के धंधे पर भी बहुत ही बुरा प्रभाव है।यही हाल रहा तो लोग भूखों पेट सोने को मजबूर हो जाएंगे।
