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कोरोनावायरस के लॉकडाउन से अपैरल इंडस्ट्री को 4 अरब डॉलर का नुकसान


सांगानेर जयपुर राजस्थान

दुनिया के अधिकतर देशों में लॉकडाउन होने से भारत के अपैरल इंडस्ट्री को तगड़ा झटका लगा है। वैश्विक अपैरल निर्यात में अच्छी-खासी पकड़ रखने वाले भारतीय अपैरल उद्योग को इस समय जो ऑर्डर कैंसलेशन और कन्साइनमेंट डिलिवरी नहीं लेने की घटनाओं से दो-चार होना पड़ रहा है।
कोरोनावायरस की वजह से दुनिया के अधिकतर देशों में लॉकडाउन होने से भारत के अपैरल इंडस्ट्री को तगड़ा झटका लगा है। वैश्विक अपैरल निर्यात में अच्छी-खासी पकड़ रखने वाले भारतीय अपैरल उद्योग को इस समय जो ऑर्डर कैंसलेशन और कन्साइनमेंट डिलिवरी नहीं लेने की घटनाओं से दो-चार होना पड़ रहा है, उसे देखते हुए अनुमान है कि यहां के निर्यातकों को करीब 4 बिलियन डॉलर का नुकसान होने वाला है।
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) का कहना है कि इस समय जिस तरह से बड़े पैमाने पर निर्यात ऑर्डर कैंसिल किए जा रहे या डिलिवरी स्थगित की जा रही है, उसे देखते हुए लगता है कि भारतीय अपैरल निर्यातकों को करीब 4 बिलियन डॉलर के निर्यात का नुकसान होगा। इसके साथ ही देश में भी लॉकडाउन हो गया है। इस वजह से यहां भी प्रॉडक्शन बंद है। यही नहीं, वैश्विक खरीदारों ने इन्हें महीनों पहले भेजे गए सामानों के लिए अभी तक पेमेंट नहीं भेजा है।
मांग रहे हैं तगड़ा डिस्काउंट

एईपीसी के अध्यक्ष ए. शक्तिवेल का कहना है कि दुनिया के नामी-गिरामी फैशन रिटेल चेन में बिकने वाले परिधानों की औसत शेल्फ लाइफ दो से चार सप्ताह की ही होती है। उसके बाद उसे भारी डिस्काउंट के साथ बेच दिया जाता है। भारतीय निर्यातकों ने जो माल लॉकडाउन के पहले ही भेज दिया है, खरीदारों ने उस कन्साइनमेंट का अभी तक पेमेंट नहीं भेजा है। अब पहले ही भेज दिए गए माल के लिए भारी डिस्काउंट मांग रहे हैं।
तत्काल चिंता मजदूरों का भुगतान
शक्तिवेल का कहना है कि मजदूरों को वेतन का भुगतान अभी उद्योग की मुख्य चिंता है। यह न सिर्फ समय की मांग है बल्कि कारोबारियों का नैतिक दायित्व है

व्योरो रिपोर्ट सोनी राजपूत