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कोटा से विधायक पुत्र की घर वापसी हेतु पास निर्गत करने से सरकार का दोहरा चरित्र हुआ उजागर: अख्तरुल इस्लाम शाहीन।


समस्तीपुर


 बिहार भाजपा के नवादा से विधायक अनिल कुमार के अपने पुत्र को कोटा से लाने हेतु सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए अख्तरुल इस्लाम शाह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कोटा में बिहार के हजारों छात्र हैं जो सरकार द्वारा लॉक डाउन घोषित कर देने की वजह से अपने परिवार से दूर बेबसी के हालत में वहां रहने को मजबुर है जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अन्य राज्यों में फंसे अपने लोगों को लाने की पहल की तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी यूपी के CM को लॉकडाउन के नियमों और उद्देश्यों का पाठ पढ़ाते हुए कह रहे थे कि उन्हें कोटा में फँसे छात्रों को वापस लाने के लिए बसों को अनुमति नहीं देनी चाहिए थी यह मर्यादा के विरुद्ध है।

वहीं दूसरी तरफ़ अपने समर्थक विधायक को गोपनीय तरीक़े से उनके बेटे को वापस लाने की अनुमति दे रहे थे। बिहार में ऐसे अनेकों VIP और सरकार तक अपनी पहुंच रखने वाले लोगो को तंत्र का बेजा दुरुपयोग कर उन्हें पास मुहैया करवाए जा रहे हैं खास तरह के लोगों को  चुपचाप बिहार में बुलाया जा रहा है। जब साधारण छात्रों और आम बिहारवासियों के बच्चों की बात आयी तो मर्यादा और नियमों का हवाला देने लगते है। इस पूरे प्रकरण से सरकार का दोहरा चरित्र बेनकाब हो गया है। बिहार के बाहर लाखों दैनिक मजदूर, कामगार फंसे हुए हैं उनके समक्ष भुखमरी की समस्या है लेकिन सरकार उनके प्रति गंभीर ना होकर अमीर और उच्च मध्यवर्गीय लोगो के तुष्टीकरण के लिए काम कर रही है गुपचुप तरीके से पास निर्गत करवा कर उन्हें अपने घरों में वापस लौटने का मार्ग प्रशस्त करवा रहे हैं। इस विपदा की घड़ी में भी अगर सरकार तटस्थ होकर निर्णय नहीं लेती है और गरीब मजदूरों के अपने घर वापसी सुनिश्चित करने हेतु कोई कदम नहीं उठाती है तो सवाल लाजमी बनता है कि क्या एक देश के अंदर अमीर के लिए अलग और गरीब के लिए अलग विधान है नीतीश कुमार को इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वस्तुस्थिति की स्थिति को स्पष्ट करना चाहिए ताकि लोगों का सरकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा कायम रह सके।



समस्तीपुर से अब्दुल कादिर