वैश्विक महामारी कोरोना और भूखमरी से निपटने मे सरकार असफल - ललन यादव
समस्तीपुर
राष्ट्रीय जनता दल के नेता ललन यादव ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि जहां एक तरफ वैश्विक महामारी कोरोना के दंश से पूरा देश जूझ रहा है वहीं दूसरी तरफ इस महामारी का दूसरा रूप भूखमरी है जिससे मजदूर वंचित शोषित काल के गाल में अपनी जिंदगी देने को मजबूर हैं। ललन यादव ने लेख के अंदाज में तंज कसते हुए केंद्र की मोदी सत्ता पर निशाना साधते हुए कहा कि "ये देश एक रंगमंच है, जिसपर माइक लिए एक प्रधानमंत्री खड़ा है।
उसके भोंपू की आवाज इतनी ऊंची है कि बाकी सभी तार्किक आवाजें सुन्न पड़ जाती हैं। प्रधानमंत्री ने वेन्टीलेटरों, प्रोटेक्टिव किट और टेस्ट किट के लिए 15 हजार करोड़ रुपए का एलान किया और भक्तजनों ने तालियां पीट दीं। जनस्वास्थ्य के सबसे बड़े शुभचिंतक के रूप में प्रधानमंत्री के चेहरे वाली फ़ोटो लिए एंकर लोगों के कानों में चीखेने लगता है। लेकिन इस घोषणा से ही इस देश में 'हेल्थ फेलियर' की जिम्मेदारी से प्रधानमंत्री को मुक्त कर देने वाले इस देश के असल अपराधी हैं। उन्होंने कहा कि आज जबकि वैश्विक महामारी पूरे देश को लीलने के लिए खड़ी हुई है। तब एक सवाल उठना लाज़िम है कि अबतक सरकार क्या कर रही थी?
30 जनवरी को भारत में कोरोना के पहले मरीज की खबर आ चुकी थी। इससे पहले ही दुनिया भर से इस वैश्विक आपदा की तस्वीरें आ चुकी थीं और 20 मार्च को जाकर भारत में वेन्टीलेटर्स बनाने के लिए घोषणा होती है। इस Health system की इस फेलियर किसे जिम्मेदार माना जाएगा? कोई प्रधानमंत्री से पूछेगा दो महीने से क्या कर रहे थे, पिछले 6 साल में वेन्टीलेटर्स के लिए क्या किया? हेल्थ सिस्टम के लिए क्या किया? उन्होंने फिर कहा मुझे मालूम है कोई जबाव देने वाला नहीं है, क्योंकि ये देश एक रंगमंच है, जिसपर माइक लिए एक प्रधानमंत्री खड़ा है। उक्त आशय की जानकारी राजद जिला मीडिया प्रभारी सह प्रवक्ता संजय नायक ने प्रेस को दी।
समस्तीपुर से अब्दुल कादिर
राष्ट्रीय जनता दल के नेता ललन यादव ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि जहां एक तरफ वैश्विक महामारी कोरोना के दंश से पूरा देश जूझ रहा है वहीं दूसरी तरफ इस महामारी का दूसरा रूप भूखमरी है जिससे मजदूर वंचित शोषित काल के गाल में अपनी जिंदगी देने को मजबूर हैं। ललन यादव ने लेख के अंदाज में तंज कसते हुए केंद्र की मोदी सत्ता पर निशाना साधते हुए कहा कि "ये देश एक रंगमंच है, जिसपर माइक लिए एक प्रधानमंत्री खड़ा है।
उसके भोंपू की आवाज इतनी ऊंची है कि बाकी सभी तार्किक आवाजें सुन्न पड़ जाती हैं। प्रधानमंत्री ने वेन्टीलेटरों, प्रोटेक्टिव किट और टेस्ट किट के लिए 15 हजार करोड़ रुपए का एलान किया और भक्तजनों ने तालियां पीट दीं। जनस्वास्थ्य के सबसे बड़े शुभचिंतक के रूप में प्रधानमंत्री के चेहरे वाली फ़ोटो लिए एंकर लोगों के कानों में चीखेने लगता है। लेकिन इस घोषणा से ही इस देश में 'हेल्थ फेलियर' की जिम्मेदारी से प्रधानमंत्री को मुक्त कर देने वाले इस देश के असल अपराधी हैं। उन्होंने कहा कि आज जबकि वैश्विक महामारी पूरे देश को लीलने के लिए खड़ी हुई है। तब एक सवाल उठना लाज़िम है कि अबतक सरकार क्या कर रही थी?
30 जनवरी को भारत में कोरोना के पहले मरीज की खबर आ चुकी थी। इससे पहले ही दुनिया भर से इस वैश्विक आपदा की तस्वीरें आ चुकी थीं और 20 मार्च को जाकर भारत में वेन्टीलेटर्स बनाने के लिए घोषणा होती है। इस Health system की इस फेलियर किसे जिम्मेदार माना जाएगा? कोई प्रधानमंत्री से पूछेगा दो महीने से क्या कर रहे थे, पिछले 6 साल में वेन्टीलेटर्स के लिए क्या किया? हेल्थ सिस्टम के लिए क्या किया? उन्होंने फिर कहा मुझे मालूम है कोई जबाव देने वाला नहीं है, क्योंकि ये देश एक रंगमंच है, जिसपर माइक लिए एक प्रधानमंत्री खड़ा है। उक्त आशय की जानकारी राजद जिला मीडिया प्रभारी सह प्रवक्ता संजय नायक ने प्रेस को दी।
समस्तीपुर से अब्दुल कादिर
