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सभी मजदूरों को 10 हजार रु० गुजारा भत्ता, मारे गए मजदूरों को 20 लाख मुआवजा एवं 3 महीने का राशन और काम की गारंटी करे सरकार

पीएम केयर फंड से सभी मजदूरों को घर पहुंचाने की मांग पर 5 मई को धरना- सुरेंद्र



समस्तीपुर   ।  3 मई '2020

  भाकपा माले जिला कमिटी सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने प्रवासी मजदूरों से घर पहुंचाने के एवज में उनसे पैसा वसूलने के सरकार के आदेश की कड़ी निंदा की है और इसे मजदूर और मानवता विरोधी कदम बताया है. इसके खिलाफ 5 मई को लॉकडाउन का पालन करते हुए 11 बजे से 3 बजे तक वामदलों के धरना देने के आह्वान के मद्देनजर जिले में भाकपा माले के कार्यकर्ता अपने- अपने घरों पर धरना पर बैठेंगे.
 माले नेता सुरेंद्र ने कहा है कि देशव्यापी विरोध के बाद अंततः सरकार प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने पर सहमत हुई है. लेकिन , केन्द्र सरकार ने अपनी जिम्मेवारी से पल्ला झाड़ते हुए ट्रेन किराया राज्य से वसूलने की बात की है. इधर बिहार सरकार ने किराया देने से इन्कार करते हुए इसे मजदूरों से वसूलने की घोषणा की है. विडंबना यह है कि पीएम केयर फंड में करोड़ों - अरबों रुपए जमा हैं और प्रधान मंत्री मोदी इसे मजदूरों पर खर्च करना नहीं चाहते।

केन्द्र और राज्य सरकार के बीच  जिम्मेवारी को लेकर फेंका - फेंकी का खेल खेला जा रहा है और पूरा बोझ भुखमरी - बेरोजगारी की मार झेल रहे मजदूरों पर ही डाला जा रहा है.
अस्पताल में सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने के बजाए केन्द्र सरकार सेना के विमान से अस्पताल आदि जगहों पर फूल बरसाने जैसे कार्यक्रम कर रही है जो निंदनीय है.
  सरकारी कर्मचारियों के वेतन कोरोना के नाम पर जबरदस्ती काटे जा रहे हैं, वहीं कॉरपोरेटों पर कोई लगाम नहीं है. सरकार उन्हें छूट पर छूट दिए जा रही है. बैंक से कॉरपोरेटों द्वारा लिए गए पैसों को वसूलने की बजाय डूबने वाले खाते में डालकर एक तरह से माफ कर दिया गया है.
डबल इंजन की तथाकथित सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब दिल्ली-पटना में भाजपा-जदयू की ही सरकार है, तो प्रवासी मजदूरों को वापस लाने में देरी क्यों हो रही है? नीतीश कुमार और सुशील मोदी इसका जवाब दें.
कोरोना लॉकडाउन के दरम्यान घर लौटने के दौरान रास्ते में, भूख, आत्महत्या, दुर्घटना, भीड़ हिंसा आदि में अनेक लोगों को जान गवांनी पड़ी है. ऐसे तमाम  मृतक मज़दूरों के परिवारों को पीएम केअर फण्ड से 20-20 लाख रु के मुआवजे देना चाहिए. यह मौत नहीं हत्या है जिसके लिए सरकार जिम्मेवार है.
उन्होंने कहा हैं कि प्रवासी मजदूरों को 10 हजार लॉक डाउन भत्ता, बिना राशन कार्ड वाले सहित सभी गरीबों को 3 माह का राशन, मारे गए मज़दूरों को 20 लाख का मुआवजा तथा मुफ्त में सुरक्षित घर वापसी की गारन्टी की जानी चाहिए.




समस्तीपुर से अब्दुल कादिर